– भृगु चक्र में अद्वितीय दशा प्रणाली है, जिसे ‘भृगु दशा’ या ‘नक्षत्र दशा’ कहा जाता है। यह जैमिनि चर दशा से मिलती-जुलती है।

इसमें विंशोत्तरी दशा के बिना भी वार्षिक फल जाना जा सकता है।

इन सूत्रों का संग्रह "भृगु सूक्तम" या "भृगु चक्र तालिका" में मिलता है।

सक्रिय भाव में कौन सा ग्रह बैठा है या उस पर किन ग्रहों की दृष्टि है, यह उस वर्ष के शुभ या अशुभ फल निर्धारित करता है। चक्र स्वामी (Cycle Lord):

यह तकनीक महर्षि भृगु के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें जातक की आयु के अनुसार कुंडली के भावों को चक्रानुक्रम में सक्रिय माना जाता है। जबकि दशा और गोचर (transit) व्यापक समय सीमा बताते हैं, BCP यह बताने में मदद करती है कि कोई घटना वास्तव में किस वर्ष घटित होगी।