, under which the first Tirthankara, Lord Adinath, is said to have meditated. Pilgrims worship the footprints (Pagla) of the Lord here. Fourth Chaityavandan (Pundarik Swami): Dedicated to Pundarik Swami
चैत्यवंदन के अंत में आमतौर पर निम्नलिखित स्तुति और काउसग्ग किया जाता है: palitana 5 chaityavandan in hindi
पाँचवाँ और अंतिम चैत्यवंदन भगवान मल्लिनाथ (19वें तीर्थंकर) के मंदिर में होता है। यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ महिला तीर्थंकर (मल्लिनाथ जी) की प्रतिमा स्थापित है, हालाँकि कुछ मान्यताओं के अनुसार वह पुरुष थे, लेकिन उनका नाम ‘मल्ली’ है। , under which the first Tirthankara, Lord Adinath,
पालीताणा के पाँच चैत्यवंदन केवल एक यात्रा या पूजा नहीं हैं; यह जीवन के प्रति दृष्टिकोण बदलने की एक कला है। जब आप उन अनगिनत सीढ़ियों पर एक-एक कदम बढ़ाते हैं, हर कदम पर अपने अहंकार, क्रोध और लोभ को पीछे छोड़ते हैं, तब जाकर आप उस शिखर पर पहुँचते हैं जहाँ केवल और ज्ञान रहता है। under which the first Tirthankara
यह पर्वत की तलहटी में स्थित पवित्र शिला है. पूरी पहाड़ी को वंदन करने के प्रतीक स्वरूप यात्री यहाँ पहला चैत्यवंदन करते हैं.